Friday, 25 October 2013

हमारे पूर्वजों की उपलब्धियां : एक नजर में

हमारे वेदों, उपनिषदों तथा पुराणों में वर्णित विभिन्न जानकारीयों की सूचि ।
आने वाले समय में हम निम्न प्रत्येक बिंदु  के बारे में पर्याप्त जानकारी एकत्रित कर लेख प्रकाशित करने की चेष्टा करेंगे।

In English : Achievements of the Ancient Hindus (Indians)
here --> https://sites.google.com/site/vvmpune/achievements-of-the-ancients-hindus/aa


चिकित्सा विज्ञान


क्रम  ज्ञान प्राचीन संदर्भ आधुनिक संदर्भ
1प्लास्टिक सर्जरी :  माथे की त्वचा द्वारा  नाक की मरम्मत सुश्रुत (4000 - 2000 ईसापूर्व )           एक जर्मन विज्ञानी
 (1968 )
2कृत्रिम अंग ऋग्वेद (1-116-15) 20वीं सदी 
3गुणसूत्रगुणाविधि - महाभारत 5500 ईसापूर्व 1860-1910 
4गुणसूत्रों की संख्या 23 महाभारत -5500 BCE    1890 A.D.
5युग्मनज में पुरुष और स्त्री गुणसूत्रों का संयोजन                        श्रीमदभागवत  (4000-2000 B.C.)20th Century
6कान की भोतिक रचना (Anatomy)               ऋग्वेद भागवतLabyrinth-McNally 1925
7गर्भावस्था के दूसरे महीने में भ्रूण के ह्रदय की शुरुआतऐतरेय उपनिषद   6000 BCश्रीमदभागवत  Robinson, 1972
8 महिला अकेले से वंशवृद्धि प्रजनन - कुंती और माद्री :- पांडव        महाभारत 5500 BC        20th Century
9 टेस्ट ट्यूब बेबी 

10  केवल डिंब(ovum) से ही          महाभारत  Not possible yet
11  केवल शुक्राणु से ही          ऋग्वेद महाभारत  Not possible yet
12   c) डिंब व शुक्राणु दोनों से महाभारत Steptoe, 1979
13जीवन का अंतरिक्ष यात्रा में बढ़ावश्रीमदभागवत   1652 BC      Not yet confirmed
14कोशिका विभाजन (3 परतों में)    श्रीमदभागवत    1652 BC      20th Century
15भ्रूणविज्ञान ऐतरेय उपनिषद   6000 BC        19th Century
16सूक्ष्म जीव                                       महाभारत 18th Century
17पदार्थ उत्पादन प्रदत बीमारी की  रोकथाम  या  इलाज,  अल्प मात्रा में श्रीमदभागवत    (1-5-33)   Hanneman,18thCentury
18विट्रो में भ्रूण का विकास      महाभारत 20th Century
19पेड़ों और पौधों में जीवन          महाभारत Bose,19th century.
20मस्तिष्क के 16 कार्य          ऐतरेय उपनिषद 19-20th Century
21नींद की परिभाषा                 प्रशनोपनिषद  6000 BC , पतंजलि योगसूत्र   5000 BC     20th Century
22जानवर की क्लोनिंग (कत्रिम उत्पति )ऋग्वेद ---
23 मनुष्य की क्लोनिंगमृत राजा वीणा से पृथु अभी तक नही 
24अहिरावण के  शरीर के तरल पदार्थ के रक्त में कोशिकाओं से क्लोनिंगपुराण May 1999- Japan 
25अश्रु - वाहिनी  आंख को नाक से जोडती है Halebid,Karnataka के शिव मंदिर में  एक व्यक्ति को द्वार चौखट में दर्शाया गया है20th century AD
26कंबुकर्णी नली (Eustachian Tube आंतरिक कान को ग्रसनी (pharynx) से जोड़ती  है         
Halebid,Karnataka के शिव मंदिर में  शिव गणों  को द्वार चौखट में दर्शाया गया है 
20th century AD
27गर्भावस्था के 5वे  महीने में भ्रूण को भूख और प्यास श्रीमदभागवत    - 1652 BCअभी तक नहीं समझा जा सका 
28मृत्यु आपान वायु पर निर्भर करती है जो गर्भावस्था के दुसरे महीने में प्रारंभ होती है ऐतरेय उपनिषद- 6000BCअभी तक नहीं समझा जा सका
29भ्रूण में सोचने की  क्षमताऐतरेय उपनिषद 7000 BCSept. 2009 Dr.Bruner





भौतिक विज्ञान


क्रमज्ञान प्राचीन संदर्भ आधुनिक संदर्भ
1प्रकाश का  वेग            ऋग्वेद -
सायण भाष्य (1400)                  
19th Century
2ट्रांस सेटर्न देवता संबंधी या शनिग्रह विषयक ग्रह       महाभारत (5561 B.C)  17-19th Century
3अन्य  सौर प्रणाली में  अंतरिक्ष यात्रा      श्रीमदभागवत     (4000 B.C) परीक्षण में 
4गुरुत्वाकर्षण       प्रशनोपनिषद  (5761 B.C)आदि शंकराचार्य  (500 B.C or 800 AD)न्यूटन 17th Century
5पराबैंगनी बैंड             Sudhumravarna (मांडूक्य उपनिषद)-
6अवरक्त बैंड (Infra-red Band)सुलोहिता मांडूक्य उपनिषद    -
7Tachyons (एक कण) प्रकाश की तुलना में तेज  Manojava (मांडूक्य उपनिषद)     Sudarshan, 1968
8परमाणु ऊर्जाSpullingini (मांडूक्य उपनिषद)20th Century.
9श्याम विविर (Black Holes)Vishvaruchi (मांडूक्य उपनिषद)20th Century
10ग्रीष्म संक्रांति में मानसून ऋग्वेद (23720 B.C)        -
11दक्षिण अमेरिका में हवाई जहाज द्वारा प्रवेश         वाल्मीकि रामायण   >7300 B.C         -
12पिस्को,पेरू, दक्षिण अमेरिका की खाड़ी, में स्फुरदीप्त ट्रिडेंट   वाल्मीकि रामायण Found in 1960 A.D.
13हवाई जहाज ऋग्वेद 15000BC
रामायण 7300 BC
महाभारत 5561 BC
समरांगण सूत्रधार (1050 A.D.)                
20th Century
14रोबोट/यंत्रमानवसमरांगण सूत्रधार 1050 AD रामायण -  कुम्भकर्ण 7300 BC20th century
15परमाणु (विभाज्य)             श्रीमदभागवत     (4000 B.C.)Dalton (Indivisible)1808 A.D.
16उपपरमाण्विक कण (इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन)भागवत (4000 BC)परमाणु Divisible -    Bequerel, 1897
Thomas Rutherford 1911
17क्वार्क - एक कण                                        परम - महान Dr. Jain Pyarelal 1980
18ब्रह्मांड की  उत्पत्ति (नासदीय सूत्र )ऋग्वेद (>10000 B.C.)Gamaow, et.al (1950) Sir Bernard Lowell 1975
19परमाणु बममहाभारत ब्रह्माश्त्र  3rd Nov.5561 B.C6th Aug.1945 A.D.
20ध्वनि ऊर्जा पाउडर सामग्री के लिए महाभारत (Vajrastra)Gavreau, 1964
21पारा हवाई जहाज के लिए ऊर्जा स्रोत के रूप में  समरांगण सूत्रधार 1050ADIndian Express, 20-10-1979 
22उत्तरी ध्रुववाल्मीकि रामायण 7000BCPiery, 1909 A.D
23दक्षिणी (Antartica)रावण वाल्मीकि रामायण >7300 BC Piery, 1950 A.D
24ब्रह्मांड में व्याप्त मौलिक तत्व         ऋग्वेद (>10000 B.C.) (अम्भ)    20th Century  (Ylem)
25मौलिक तत्व की रचना (अभू नासदीयगैसिय कण/बूंदें ऋग्वेद (>10000 B.C)     Gammow, 1950
26जल का  प्राकृतिक चक्रऋग्वेद &  वाल्मीकि रामायण 19th Century
27विद्युत एकदिश वाह (DC)मित्र वरुण तेज/शक्ति, अगस्त्य  18th Century
28विद्युत के द्वारा जल विश्लेषण (2H2 + O2) प्राण वायु + उदान वायु   - अगस्त्य  19th Century
29विद्युत आवरण/लेपन            अगस्त्य  19th Century
30गुब्बारे में H2 (उदान वायु) भर कर उड़ना अगस्त्य  
31वेगा 12000 ई.पू. के दौरान ध्रुवतारा बना महाभारत (Vanaparva 230)20th Century
32सूरज की किरणों में सात रंग       ऋग्वेद (8-72-16)          
33सूर्य पर काले धब्बेवाल्मीकि रामायण & तथा वेद >7300         
34सागर पर अस्थायी पुल वाल्मीकि रामायण 26-30 October 7292 BC           
35विषुव और संक्रांति      ऋग्वेद (10-18-1)  25000BC          
36 उल्का (Meteors)"उल्का" अथर्ववेद (19-9)  7000BC
37पाइथागोरस प्रमेय (बौधायन प्रमेय)शुल्ब सूत्र  (800 BC)    पाइथागोरस , 500 BC
38धूमकेतु/पुच्छलतारा ऋग्वेद , (मुल नक्षत्र)
वाल्मीकि रामायण 7000BC 
(मुल नक्षत्र)
 महाभारत 5561 BC (पुरुष नक्षत्र)   

39Aldebaren (एक विशाल तारा) में मंगल ग्रह                     वाल्मीकि रामायण 7000 BC                   अभी तक पुनः घटित नही हुआ 
40Aldebaren में शनि महाभारत 5561 BCअभी तक पुनः घटित नही हुआ 
41तारों का श्वास लेना ऋग्वेद (नासदीय सूत्र )Gamov, 1950
42 एक तारे में ऊष्मा तथा गुरुत्व का उत्पादन ऋग्वेद (नासदीय )Gamov, 1950
43स्रष्टि उत्पति का क्रम :-अंतरिक्ष, गैस, गर्मी/अग्नि , पानी, और पृथ्वी/ठोस ऋग्वेद तैत्तिरीय उपनिषद्-
44पृथ्वी की आयु महाभारत पुराण 
3.456 X 10^10 years 
Salim, Jogesh Pati, 1980
10^10 years -Sir Lowell
45इलेक्ट्रॉन की  आयु 1.2 x 10^15 years-
46प्रोटॉन की आयु 1.9 x 10^25 years10^30 years
47राशि चक्र के 12 लक्षण/चिन्ह ऋग्वेद 23920 BCप्रशनोपनिषद  5761 BC400 BC
48विशिष्ट गुरुत्व के अनुसार वातावरण की परतेंवाल्मीकि रामायण (Kish.8) 
49माइक्रोस्कोपमहाभारत - शांति पर्व 15/26(5500 BC)      16th Century
50चश्मा (उपनेत्र)   आदि शंकराचार्य -अपरोक्ष अनुभूति 81
कम से कम  8 वी सदी             
16th Century
51ग्रहों पर अलग अलग समय के पैमानेमहाभारत /श्रीमदभागवत     /व्यास जी >1600BC20th century.
52जंग न लगने वाला लोह पदार्थ ईसाई युग की शुरूआतnot yet done
53संगीतीय  पत्थर के खम्भे 1000 AD और पूर्व not yet done
54Stationary Sun  appears   moving           Arya Bhatta-  First century AD16th century
Jnaneshwar 13 century AD
55No land, only sea, between The Pillar of Somnath Temple & Antarctica10th century AD.20th century AD
56अफ्रीका के  जिराफकोणार्क सूर्य मंदिर में नक्काशी 10वी सदी पूर्व 15th century AD
57रंग प्रौद्योगिकीअजांता रंग क्षीण नही  होता  आधुनिक रंग क्षीण  होता है  
58नक्काशी प्रौद्योगिकी एलोरा में  शिव मंदिर एक पहाड़ी से 2000 साल पहले नक्काशीदार बनाया गया not done
59ध्वन्यात्मक/ध्वनिप्रधान लिपि (Phonetic script)वेद > 23000 BCnot done
60सूर्यग्रहण - कारणवेद > 23000 BC16th century
61पूर्ण ग्रहण की समाप्तिऋग्वेद सौर नेत्र Diamond ring                    
62 अरुंधति वशिस्ठ (तारों के नाम) के आगेमहाभारत 5561 BC2011 AD
63अभिजीत (वेगा/तारे ) की  फिसलन महाभारत 5561 BC में गिरावट, 20,000 ईसा पूर्व में शुरू हुआrecently noted
when? not known.
64सप्ताह प्रणालीतैतरीय सहिंता  8357 BCA.D.
65सप्ताह नाम तैतरीय सहिंता  8357 BCA.D.
66विभिन्न ग्रहों की  दूरीतैतरीय सहिंता 8357 BC16th century
67नये  चंद्रमा दिन का कारणवेद > 20,000 BCWrong name-Moon not new
68 सभी ग्रहों पर ग्रहण देखा जा सकता है वेद > 20,000 BC2009 AD
69बुद्धि/विचार मस्तिष्क से भिन्न  (Mind different from brain)वेद > 20,000 BC2009 AD
70मृत्यु के बाद जीवनवेद > 20,000 BCnot sure still.
71भ्रूण का स्थानांतरणSankarshana >5626 BC20th century.
72Out of Earth Ambareesh [thrown (EEsh) in sky (Ambar)] Vishwamitra >Ramayan of 7300 BC1956 AD.
73डायनासौर की सूचना महाभारत 5500 BC20th century
74मन/बुद्धि(mind)  की क्लोनिंग     ऋग्वेद कहता है - यह असंभव  है !!!करने का स्वप्न देख रहे है :D -
 मुर्ख कभी नही कर पाएंगे !!
75वर्ग घन मूल आदि यजुर्वेद रूद्र > BC era16th century


उपरोक्त संपूर्ण जानकारी डाo पद्माकर विष्णु वार्ताक द्वारा हमारे शाश्त्रों पर गहन शोध कर प्राप्त की गई है । 
तथा वे उपरोक्त पर प्रमाण सहित अनेकों पुस्तकें लिख चुके है यहाँ देखें  

http://www.drpvvartak.com/

जब हमारे पूर्वज सम्पूर्ण ज्ञान पुस्तकों में समाविष्ट कर चुके थे तब विदेशी जाती अस्तित्व में ही नही थी । उस समय विदेशी धरती 1 किमी मोटी  बरफ के निचे थी  --referred to as the quaternary ice age.

न्याय के प्रवर्तक ऋषि गौतम

न्याय के प्रवर्तक ऋषि गौतम


वह शास्त्र जिसमें किसी वस्तु के यथार्थ ज्ञान के लिये विचारों की उचित योजना का निरुपण होता है,न्यायशास्त्र कहलाता है | वर्तमान समय में विश्व में उपस्थित कानून प्रणाली प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से इसी शास्त्र पर आधारित है । वैदिक ऋषि गौतम (व्यक्तिगत नाम 'अक्षपाद') ने भगवान शिव के आदेश पर इस शास्त्र की रचना की ताकि आने वाले समय में जब प्रत्येक व्यक्ति सत्य की अलग अलग प्रकार से व्याख्या करेंगे तब सत्य तक पहुँचने हेतु यह तार्किक प्रणाली उपयोगी सिद्ध होगी । इसका वर्णन शिव महापुराण  में मिलता है | 

महर्षि गौतम परम तपस्वी एवं संयमी थे। महाराज वृद्धाश्व की पुत्री अहिल्या इनकी पत्नी थी, जो महर्षि के शाप से पाषाण बन गयी थी। त्रेता युग में भगवान श्री राम की चरण-रज से अहिल्या का शापमोचन हुआ, जिससे वह पुन: पाषाण से पुन: ऋषि पत्नी बनी ।
 गौतम ऋषि के न्याय दर्शन में सोलह तथ्यों का उल्लेख प्राप्त होता है 

प्रमाण-प्रमेय-संशय-प्रयोजन-दृष्टान्त-सिद्धान्तावयव-तर्क-निर्णय-वाद-जल्प-वितण्डाहेत्वाभास-च्छल-जाति-निग्रहस्थानानाम्तत्त्वज्ञानात् निःश्रेयसाधिगमः

जिसमें प्रमाण, प्रमेय, संशय, प्रयोजन, दृष्टांत, सिद्धात, अवयव, तर्क, निर्णय, वाद, जल्प, वितंडा, हेत्वाभास, छल, जाति, निग्रह स्थान हैं. न्याय चार तरह के प्रमाणों की चर्चा करता है-: अनुभूति (प्रत्यक्ष), अर्थ निकालना (अनुमान), तुलना करना (उपमान) और शब्द (साक्य)। 
 अप्रामाणिक ज्ञान में स्मृति, शंका, भूल और काल्पनिक वाद-विवाद शामिल हैं। 
न्यायदर्शन में प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द - ये चार प्रमाण (Prof) माने गए हैं।
 प्रत्यक्ष का अर्थ है इंद्रियों के साथ सीधा संपर्क होना, अर्थात स्वयं सुनना, देखना, चखना आदि।
 निष्कर्ष तक पहुंचने का जो साधन हो, उसे अनुमान कहते हैं।
 एक वस्तु से दूसरे वस्तु की तुलना कर उसका ज्ञान होना उपमान कहलाता है।
 यथार्थ वाक्य या विद्वानों की कही हुई बातें शब्द प्रमाण कहलाती हैं।

 प्रमाण के द्वारा हम अपने अनुभव के सही या गलत होने का विश्लेषण कर सकते हैं। दर्शन केवल बडे दार्शनिकों के बीच संवाद न होकर संपूर्ण समाज के सोचने-समझने का तरीका है। वाद का अर्थ है-ज्ञान प्राप्ति के लिए की जाने वाली बहस। जिस बहस में जीतना ही उद्देश्य हो, उसे विवाद कहते हैं। यदि हार की संभावना के कारण बहस का उद्देश्य भटक जाए, तो उसे वितंडा कहा जाता है। हेत्वाभास का अर्थ है किसी कारण का दिया जाना, जो कारण लगता है, लेकिन यथार्थ में वह कारण नहीं है। शब्द की विभिन्न वृत्तियों को उलट कर यदि उसके द्वारा किसी बात का विरोध किया जाए, तो वह छल कहा जाता है।
 इस तरह, न्याय तर्क के द्वारा सत्य तक पहुंचने का मार्ग है।

 प्रत्यक्ष प्रमाण इन्द्रियों का विषय के साथ संबंध होने पर जो ज्ञान मिलता है, जो शब्दात्मक नहीं होता अर्थात जिसमे बात की कोई आवश्यकता नही क्योकि जो आँखों द्वारा प्रत्यक्ष देखा गया हो वह सर्व श्रेष्ठ है |
 तथा जो बाद में खंडित या बाधित न होने वाला निश्चयात्मक ज्ञान होता है, वही प्रत्यक्ष है। 


अनुमान प्रमाण प्रत्यक्ष के बाद गौतम ने अनुमान का वर्णन किया है। गौतम के अनुसार अनुमान तीन प्रकार का है- पूर्ववत्, शेषवत् और सामान्यतोदृष्ट। 
इसके अंतर्गत भूतकाल तथा वर्तमान काल की परिस्थितियों के आधार पर भविष्य का अनुमान लगाया जाता है   जैसे :
कि वर्तमान में आसमान में बादल घिरे हुए देखकर हम अनुमान लगाते हैं कि अब बारिश होगी। और अनुमान विधि के द्वारा यह बात कदाचित ठीक ही बेठती है  |
धुएं को देख कर ये अनुमान लगाना की यहाँ निश्चय ही आग लगी होगी आदि |
 जिसमें वर्तमान वस्तु स्थिति का ही एकदेश देखकर उसके अवशिष्ट देश के सम्बन्ध में अनुमान किया जाता है, वह शेषवत् अनुमान है। जैसे कि समुद्र की एक बूँद चखकर समुद्र का सारा पानी खारा है, ऐसा अनुमान। जिस अनुमान में दिये जाने वाले प्रत्यक्ष दृष्ट उदाहरण साध्य के साक्षात् उदाहरण नहीं है, साध्य की जाति के नहीं हैं, बल्कि साध्य के सदृश हैं, वह अनुमान सामान्य यानी सादृश्य पर आधारित होने के कारण सामान्यतोदृष्ट कहलाता है, बल्कि साध्य का दर्शन सादृश्य के माध्यम से ही हो सकता है। जैसे कि चंद्र की गति हम प्रत्यक्षत: नहीं देख सकते, लेकिन चंद्र अपना स्थान बदलता है, इतना हम देख सकते हैं। इस स्थानान्तरण से हम अनुमान लगाते हैं कि चंद्र ज़रूर गतिमान है। उसी प्रकार ज्ञानेन्द्रियों का प्रत्यक्ष ज्ञान हमें कभी नहीं होता है, बल्कि दूसरे क्रियासाधकों के साथ सादृश्य जानकर ज्ञान साधन के रूप में हम सिर्फ़ उनका अनुमान ही कर सकते हैं।


 उपमान प्रमाण तीसरा उपमान प्रमाण है। उपमान किसी अप्रसिद्ध वस्तु की ऐसी जानकारी है, जो प्रसिद्ध वस्तु के साथ उसका साधर्म्य जानकर होती है। जैसे हमें अगर गवय नामक प्राणी की जानकारी न हो और हमें किसी सत्य वक्ता ने बताया हो कि गवय बैल होता है, तो उसके बताए हुए सादृश्य के आधार पर हम गवय को पहचान सकते हैं। 

प्रमाण का चोथा प्रकार शब्द (बात /वार्ता ) है, जो आप्त (यथार्थवक्ता) का वचन है। शब्द प्रमाण आत्मा, शरीर, इन्द्रिय, (पंच ज्ञानेन्द्रिय), अर्थ (रूपरसगन्धस्पर्शशब्द) बुद्धि (ज्ञान), मनस, प्रवृत्ति, दोष, प्रेत्यभाव (मरणोत्तर अस्तित्व) फल, दु:ख और अपवर्ग (मोक्ष) यह बारह प्रमेय हैं। इनके स्वरूप का ज्ञान अपवर्ग के लिए उपयोगी है। गौतम मानते हैं कि अपवर्ग के लिए सर्वप्रथम मिथ्या ज्ञान का नाश होना चाहिए। उसी से काम, क्रोधादि दोषों का नाश हो सकता है। उससे कर्म के प्रति प्रवृत्ति का नाश होगा तथा प्रवृत्ति नाश से हीपुनर्जन्म श्रृंखला खंडित होगी। पुनर्जन्म श्रृंखला खंडित होने से ही दु:ख का नाश होगा और दु:ख नाश ही अपवर्ग का स्वरूप है। 

उपरोक्त वर्णन केवल प्रमाण के चार प्रकारों का संक्षिप्त वर्णन  है इसके अतिरिक्त श्री गौतम ने  प्रमेय, संशय, प्रयोजन, दृष्टांत, सिद्धात, अवयव, तर्क, निर्णय, वाद, जल्प, वितंडा, हेत्वाभास, छल, जाति, निग्रह आदि पर भी पूर्ण वर्णन समाज कल्याण हेतु न्यायशास्त्र के रूप में दिया |

अधिक जानकारी के लिए देखें :
http://hi.wikipedia.org/wiki/न्याय_दर्शन
http://bharatdiscovery.org/india/न्याय_दर्शन

महान रसायनशास्त्री व धातुकर्मी: नागार्जुन

महान रसायनशास्त्री व धातुकर्मी: नागार्जुन


प्राचीन भारत में नागार्जुन नाम के महान रसायन शास्त्री हुए हैं। इनकी जन्म तिथि एवं जन्मस्थान के विषय में अलग-अलग मत हैं। एक मत के अनुसार इनका जन्म 2 शताब्दी में हुआ था तथा अन्य मतानुसार नागार्जुन का जन्म सन् ९३१ में गुजरात में सोमनाथ के निकट दैहक नामक किले में हुआ था|
नागार्जुन ने रसायन शास्त्र और धातु विज्ञान पर बहुत शोध कार्य किया। रसायन शास्त्र पर इन्होंने कई पुस्तकों की रचना की जिनमें 'रस रत्नाकर' और 'रसेन्द्र मंगल' बहुत प्रसिद्ध हैं।
रसायनशास्त्री व धातुकर्मी होने के साथ साथ इन्होंने अपनी चिकित्सकीय ‍सूझबूझ से अनेक असाध्य रोगों की औषधियाँ तैयार की। चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में इनकी प्रसिद्ध पुस्तकें 'कक्षपुटतंत्र', 'आरोग्य मंजरी', 'योग सार' और 'योगाष्टक' हैं।
अपनी पुस्तक रसरत्नाकर में इन्होने रसायन का अथाह ज्ञान पिरो दिया  |
नागार्जुन के रस रत्नाकर में अयस्क सिनाबार से पारद को प्राप्त करने की आसवन (डिस्टीलेशन) विधि, रजत के धातुकर्म का वर्णन  तथा वनस्पतियों से कई प्रकार के अम्ल और क्षार की प्राप्ति की भी विधियां वर्णित हैं। 
इसके अतिरिक्त  रसरत्नाकर में रस (पारे के योगिक) बनाने के प्रयोग दिए गये हैं। इसमें देश में धातुकर्म और कीमियागरी के स्तर का सर्वेक्षण भी दिया गया था। इस पुस्तक में चांदी, सोना, टिन और तांबे की कच्ची धातु निकालने और उसे शुद्ध करने के तरीके भी बताये गए हैं।
पारे से संजीवनी और अन्य पदार्थ बनाने के लिए नागार्जुन ने पशुओं और वनस्पति तत्वों और अम्ल और खनिजों का भी इस्तेमाल किया। हीरे, धातु और मोती घोलने के लिए उन्होंने वनस्पति से बने तेजाबों का सुझाव दिया। उसमें खट्टा दलिया, पौधे और फलों के रस थे।
पुस्तक में विस्तारपूर्ण दिया गया है कि अन्य धातुएं सोने में कैसे बदल सकती हैं। यदि सोना न भी बने रसागम विशमन द्वारा ऐसी धातुएं बनाई जा सकती हैं जिनकी पीली चमक सोने जैसी ही होती थी। हिंगुल और टिन जैसे केलमाइन से पारे जैसी वस्तु बनाने का तरीका दिया गया है। 
अधिक जानकारी के लिए देखे: 
https://sites.google.com/site/ekatmatastotra/stotra/scientists/nagarjuna

महर्षि भारद्वाज रचित ‘विमान शास्त्र‘

महर्षि भारद्वाज रचित ‘विमान शास्त्र‘


जन सामान्य में हमारे प्राचीन ऋषियों-मुनियों के बारे में ऐसी धारणा जड़ जमाकर बैठी हुई है कि वे जंगलों में रहते थे, जटाजूटधारी थे, भगवा वस्त्र पहनते थे, झोपड़ियों में रहते हुए दिन-रात ब्रह्म-चिन्तन में निमग्न रहते थे, सांसारिकता से उन्हें कुछ भी लेना-देना नहीं रहता था।
इसी पंगु अवधारणा का एक बहुत बड़ा अनर्थकारी पहलू यह है कि हम अपने महान पूर्वजों के जीवन के उस पक्ष को एकदम भुला बैठे, जो उनके महान् वैज्ञानिक होने को न केवल उजागर करता है वरन् सप्रमाण पुष्ट भी करता है। महर्षि भरद्वाज हमारे उन प्राचीन विज्ञानवेत्ताओं में से ही एक ऐसे महान् वैज्ञानिक थे जिनका जीवन तो अति साधारण था लेकिन उनके पास लोकोपकारक विज्ञान की महान दृष्टि थी।
महर्षि भारद्वाज और कोई नही बल्कि वही  ऋषि है जिन्हें त्रेता युग में  भगवान श्री राम से मिलने का सोभाग्य दो बार प्राप्त हुआ । एक बार श्री राम के  वनवास काल में तथा दूसरी बार श्रीलंका से लौट कर अयोध्या जाते समय। इसका वर्णन वाल्मिकी रामायण तथा तुलसीदास कृत रामचरितमानस में मिलता है |
 तीर्थराज प्रयाग में संगम से थोड़ी दूरी पर इनका आश्रम था, जो आज भी विद्यमान है। महर्षि भरद्वाज की दो पुत्रियाँ थीं, जिनमें से एक (सम्भवत: मैत्रेयी) महर्षि याज्ञवल्क्य को ब्याही थीं और दूसरी इडविडा (इलविला) विश्रवा मुनि को |
महाभारत काल तथा उससे पूर्व भारतवर्ष में भी विमान विद्या का विकास हुआ था । न केवल विमान अपितु अंतरिक्ष में स्थित नगर रचना भी हुई थी | इसके अनेक संदर्भ प्राचीन वांग्मय में मिलते हैं । 
निश्चित रूप से उस समय ऐसी विद्या अस्तित्व में थी जिसके द्वारा भारहीनता (zero gravity) की स्थति उत्पन्न की जा सकती थी । यदि पृथ्वी की गरूत्वाकर्षण शक्ति का उसी मात्रा में विपरीत दिशा में प्रयोग किया जाये तो भारहीनता उत्पन्न कर पाना संभव है |

विद्या वाचस्पति पं. मधुसूदन सरस्वती " इन्द्रविजय " नामक ग्रंथ में ऋग्वेद के छत्तीसवें सूक्त प्रथम मंत्र का अर्थ लिखते हुए कहते हैं कि ऋभुओं ने तीन पहियों वाला ऐसा रथ बनाया था जो अंतरिक्ष में उड़ सकता था । पुराणों में विभिन्न देवी देवता , यक्ष , विद्याधर आदि विमानों द्वारा यात्रा करते हैं इस प्रकार के उल्लेख आते हैं । त्रिपुरासुर याने तीन असुर भाइयों ने अंतरिक्ष में तीन अजेय नगरों का निर्माण किया था , जो पृथ्वी, जल, व आकाश में आ जा सकते थे और भगवान शिव ने जिन्हें नष्ट किया ।

 वेदों मे विमान संबंधी उल्लेख अनेक स्थलों पर मिलते हैं। ऋषि देवताओं द्वारा निर्मित तीन पहियों के ऐसे रथ का उल्लेखऋग्वेद (मण्डल 4, सूत्र 25, 26) में मिलता है, जो अंतरिक्ष में भ्रमण करता है। ऋषिओं ने मनुष्य-योनि से देवभाव पाया था। देवताओं के वैद्य अश्विनीकुमारों द्वारा निर्मित पक्षी की तरह उडऩे वाले त्रितल रथ, विद्युत-रथ और त्रिचक्र रथ का उल्लेख भी पाया जाता है। महाभारत में श्री कृष्ण, जरासंध आदि के विमानों का वर्णन आता है ।

वाल्मीकि रामायण में वर्णित ‘पुष्पक विमान’ (जो लंकापति रावण के पास था) के नाम से तो प्राय: सभी परिचित हैं। लेकिन इन सबको कपोल-कल्पित माना जाता रहा है। लगभग छह दशक पूर्व सुविख्यात भारतीय वैज्ञानिक डॉ0 वामनराव काटेकर ने अपने एक शोध-प्रबंध में पुष्पक विमान को अगस्त्य मुनि द्वारा निर्मित बतलाया था, जिसका आधार `अगस्त्य संहिता´ की एक प्राचीन पाण्डुलिपि थी। अगस्त्य के `अग्नियान´ ग्रंथ के भी सन्दर्भ अन्यत्र भी मिले हैं। इनमें विमान में प्रयुक्तविद्युत्-ऊर्जा के लिए `मित्रावरुण तेज´ का उल्लेख है। महर्षि भरद्वाज ऐसे पहले विमान-शास्त्री हैं, जिन्होंने अगस्त्य के समय के विद्युत् ज्ञान को अभिवर्द्धित किया। 
 महर्षि भारद्वाज ने " यंत्र सर्वस्व " नामक ग्रंथ लिखा था, जिसमे सभी प्रकार के यंत्रों के बनाने तथा उन के संचालन का विस्तृत वर्णन किया। उसका एक भागवैमानिक शास्त्र है |
इस ग्रंथ के पहले प्रकरण में प्राचीन विज्ञान विषय के पच्चीस ग्रंथों की एक सूची है, जिनमें प्रमुख है अगस्त्यकृत - शक्तिसूत्र, ईश्वरकृत - सौदामिनी कला, भरद्वाजकृत - अशुबोधिनी, यंत्रसर्वसव तथा आकाश शास्त्र, शाकटायन कृत - वायुतत्त्व प्रकरण, नारदकृत - वैश्वानरतंत्र, धूम प्रकरण आदि ।
 विमान शास्त्र की टीका लिखने वाले बोधानन्द लिखते है -
 निर्मथ्य तद्वेदाम्बुधिं भरद्वाजो महामुनिः । 
 नवनीतं समुद्घृत्य यन्त्रसर्वस्वरूपकम्‌ ।
 प्रायच्छत्‌ सर्वलोकानामीप्सिताज्ञर्थ लप्रदम्‌ ।
 तस्मिन चत्वरिंशतिकाधिकारे सम्प्रदर्शितम्‌ ॥ 
 नाविमानर्वैचित्र्‌यरचनाक्रमबोधकम्‌ । 
 अष्टाध्यायैर्विभजितं शताधिकरणैर्युतम । 
 सूत्रैः पञ्‌चशतैर्युक्तं व्योमयानप्रधानकम्‌ । 
 वैमानिकाधिकरणमुक्तं भगवतास्वयम्‌ ॥ 
अर्थात - भरद्वाज महामुनि ने वेदरूपी समुद्र का मन्थन करके यन्त्र सर्वस्व नाम का ऐसा मक्खन निकाला है , जो मनुष्य मात्र के लिए इच्छित फल देने वाला है । उसके चालीसवें अधिकरण में वैमानिक प्रकरण जिसमें विमान विषयक रचना के क्रम कहे गए हैं । यह ग्रंथ आठ अध्याय में विभाजित है तथा उसमें एक सौ अधिकरण तथा पाँच सौ सूत्र हैं तथा उसमें विमान का विषय ही प्रधान है । ग्रंथ के बारे में बताने के बादबोधानन्द भरद्वाज मुनि के पूर्व हुए आचार्य व उनके ग्रंथों के बारे में लिखते हैं |  वे आचार्य तथा उनके ग्रंथ निम्नानुसार हैं ।
( १ ) नारायण कृत - विमान चन्द्रिका ( २ ) शौनक कृत न् व्योमयान तंत्र ( ३ ) गर्ग - यन्त्रकल्प ( ४ ) वायस्पतिकृत - यान बिन्दु + चाक्रायणीकृत खेटयान प्रदीपिका ( ६ ) धुण्डीनाथ - व्योमयानार्क प्रकाश 
  
विमान की परिभाषा देते हुए अष् नारायण ऋषि कहते हैं जो पृथ्वी, जल तथा आकाश में पक्षियों के समान वेग पूर्वक चल सके, उसका नाम विमान है ।

शौनक के अनुसार- एक स्थान से दूसरे स्थान को आकाश मार्ग से जा सके ,
विश्वम्भर के अनुसार - एक देश से दूसरे देश या एक ग्रह से दूसरे ग्रह जा सके, उसे विमान कहते हैं ।  
अन्तर्राष्ट्रीय संस्कृत शोध मण्डल ने प्राचीन पाण्डुलिपियों की खोज के विशेष प्रयास किये। फलस्वरूप् जो ग्रन्थ मिले, उनके आधार पर भरद्वाज का `विमान-प्रकरण´, विमान शास्त्र प्रकाश में आया। इस ग्रन्थ का बारीकी से अध्यन करने पर आठ प्रकार के विमानों का पता चला : 
1. शक्त्युद्गम - बिजली से चलने वाला। 
2. भूतवाह - अग्नि, जल और वायु से चलने वाला। 
3. धूमयान - गैस से चलने वाला। 
4. शिखोद्गम - तेल से चलने वाला। 
5. अंशुवाह - सूर्यरश्मियों से चलने वाला। 
6. तारामुख - चुम्बक से चलने वाला। 
7. मणिवाह - चन्द्रकान्त, सूर्यकान्त मणियों से चलने वाला। 
8. मरुत्सखा - केवल वायु से चलने वाला। 

 इसी ग्रन्थ के आधार पर भारत के बम्बई निवासी शिवकर जी ने Wright brothers से 8 वर्ष पूर्व ही एक विमान का निर्माण कर लिया था ।
सर्वप्रथम इस विमान शास्त्र को मिथ्या माना  गया परन्तु अध्यन से चोंका देने वाले तथ्य सामने आये जैसे विमान का जो प्रारूप तथा जिन धातुओं  से  विमान का निर्माण इस विमान शास्त्र में उल्लेखित है  वह परिकल्पना आधुनिक विमान निर्माण पद्धति से मेल  खाती है

एक और विडियो देखें यह है तो तेलुगु भाषा में परन्तु यदि आप न भी समझ पाए फिर भी  आप विडियो तो देख ही सकते है :

अधिक जानकारी के लिए देखे:
http://www.thelivingmoon.com/47brotherthebig/03files/Vimanas_Mercury_Vortex_Technology.html 
https://sites.google.com/site/ekatmatastotra/stotra/scientists/bhardwaja
http://www.bibliotecapleyades.net/vimanas/vimanas.htm#menu
http://www.hindusthangaurav.com/viman.asp
http://www.hindi.kalkion.com/article/546
http://www.savehinduism.in/stories/article/925.html
http://www.hindi.kalkion.com/article/546
गूगल किताब 

Sunday, 13 October 2013

भारत रत्न भाई श्री राजीव दीक्षित जी को शत शत नमन !!! अब श्री राजीव दिक्षित जी की दस (10) पुस्तकें PDF रूप में उपलब्ध है, विशेष बात यह है की लगभग सभी पुस्तकों का नवीन संस्करण है और PDF फाइल की साइज़ बहुत ही कम है । इनमें मुख्य पुस्तकें जो आपके लिए बहुत लाभदायक है इन्हे डाउनलोड करे और अपने मित्रो रिश्तेदारो तक भी पहुचाएं

भारत रत्न भाई श्री राजीव दीक्षित जी को शत शत नमन !!!

अब श्री राजीव दिक्षित जी की दस (10) पुस्तकें PDF रूप में उपलब्ध है, विशेष बात यह है की लगभग सभी पुस्तकों का नवीन संस्करण है और PDF फाइल की साइज़ बहुत ही कम है ।
इनमें मुख्य पुस्तकें जो आपके लिए बहुत लाभदायक है इन्हे डाउनलोड करे और अपने मित्रो रिश्तेदारो तक भी पहुचाएं

*स्वदेशी चिकित्सा - भाग 1 ( दिनचर्या - ऋतुचर्या के आधार पर )
लिंक:: http://archive.org/download/RajivDixitBooks/SwadeshiChikitsa-1.pdf

*स्वदेशी चिकित्सा - भाग 2 ( बिमारियों को ठीक करने के आयुर्वेदिक नुस्ख़े )
लिंक:: http://archive.org/download/RajivDixitBooks/SwadeshiChikitsa-2.pdf

* स्वदेशी चिकित्सा - भाग 3 ( बिमारियों को ठीक करने के आयुर्वेदिक नुस्ख़े )
लिंक:: http://archive.org/download/RajivDixitBooks/SwadeshiChikitsa-3.pdf

* स्वदेशी चिकित्सा - भाग 4 ( गंभीर रोगों की घरेलु चिकित्सा )
लिंक:: http://archive.org/download/RajivDixitBooks/SwadeshiChikitsa-4.pdf

* गौमाता पंचगव्य चिकित्सा
लिंक:: http://archive.org/download/RajivDixitBooks/GaumataPanchagavyaChikitsa.pdf

* गौ-गौवंश पर आधारित स्वदेशी कृषि
लिंक:: http://archive.org/download/RajivDixitBooks/Gau-GauVanshParAdharitSwadeshiKrushi.pdf

* गुलामी और लूट का दस्तावेज - WTO
लिंक:: http://archive.org/download/RajivDixitBooks/GulamiAurLootKaDastavej-WTO.pdf

* आपका स्वास्थ्य आपके हाथ
लिंक:: http://archive.org/download/RajivDixitBooks/AapkaSwasthyaAapkeKeHaath.pdf

* स्वावलंबी और अहिंसक उपचार
लिंक:: http://archive.org/download/RajivDixitBooks/SwalambiAurAhinsakUpchar.pdf

* सच्चे स्वराज्य की रुपरेखा
लिंक:: http://archive.org/download/RajivDixitBooks/SaccheSwarajKiRooprekha.pdf और
राजीव भाई के सभी ऑडियो व्याख्यान के downloed linkes जिसे ये पसंद आए कृपया वो इसे फैलाए भारत को चाहिये कुछ और राजीव दीक्षित !!!
http://98.130.113.92/Bharat_Ke_Samajik_Evam_Charitrik_Patan_Ka_Shadyantra.mp3
http://98.130.113.92/Sangathan_Ki_Maryada_Evam_Siddhant.mp3
http://98.130.113.92/Bharat_Ka_Swarnim_Atit.mp3
http://98.130.113.92/Bharat_Ki_Vishwa_Ko_Den.mp3
http://98.130.113.92/Aetihaasik_Bhoolen.mp3
http://98.130.113.92/Bharat_Mein_Gulaami_Ki_Nishaaniyan.mp3
http://98.130.113.92/Videshi_Kampaniyon_Ki_Loot_Evam_Swadeshi_Ka_Darshan.mp3
http://98.130.113.92/Mansaahaar_Se_Haaniyan.mp3
http://98.130.113.92/Swadeshi_Se_Swawlambi_Bharat.mp3
http://98.130.113.92/Angrejee_Bhasha_Ki_Gulaami.mp3
http://98.130.113.92/Bharat_Ka_Sanskrutik_Patan.mp3
http://98.130.113.92/Vish_Mukt_Kheti.mp3
http://98.130.113.92/Sanskrut_Bhasha_Ki_Vaigyanikta.mp3
http://98.130.113.92/Vyavastha_Parivartan_Ki_Kranti.mp3
http://98.130.113.92/Antarraashtriya_Sandhiyon_Mein_Phansa_Bharat.mp3
http://98.130.113.92/Maut_Ka_Vyapar.mp3
http://98.130.113.92/Swaasthya_Katha.mp3
http://98.130.113.92/Kheti_Aur_Kisaano_Ki_Gulaami.mp3
http://98.130.113.92/Swiss_Banks_Mein_Bharat_Ki_Loot.mp3
http://98.130.113.92/Bharatiya_Azaadi_Ka_Itihaas.mp3
http://98.130.113.92/Videshi_Vigyapano_Ka_Jhoot.mp3
http://98.130.113.92/Elizabeth_Ki_Bharat_Yaatra_1997.mp3
http://98.130.113.92/Macaulay_Shikshan_Paddhati.mp3
http://98.130.113.92/Udharikaran_Aur_Vaishvikaran.mp3
http://98.130.113.92/Vigyapano_Ka_Baal_Mann_Par_Prabhav.mp3
http://98.130.113.92/Goraksha_Aur_Uska_Mahatv.mp3
http://98.130.113.92/Ram_Katha_Naye_Sandarbh_Mein.mp3
http://98.130.113.92/Mahatma_Gandhi_Ko_Shradhanjali.mp3
http://98.130.113.92/Patent_Kaanoon_Aur_Davao_Par_Hamla.mp3
http://98.130.113.92/Patent_Kaanoon_Aur_Davao_Par_Hamla.mp3
http://98.130.113.92/Pokhran_Parikshan_Aur_Arthik_Dighbandhan.mp3
http://98.130.113.92/Bharat_Aur_Europe_Ki_Sanskruti.mp3
http://98.130.113.92/Jan_Gan_Vande_Mataram_ki_kahani.mp3
http://98.130.113.92/Bharat_Aur_Paschimi_Vigyan_Takniki.mp3
http://98.130.113.92/CTBT_Aur_Bharatiya_Asmita.mp3
http://98.130.113.92/Arthvyavastha_Ko_Sudhaarne_Ke_Upaay.mp3
http://98.130.113.92/Arthvyavastha_Ko_Sudhaarne_Ke_Upaay.mp3
http://98.130.113.92/Pratibha_Palaayan_Pune_Engg_College.mp3
http://98.130.113.92/Swadeshi_Andolan_Mein_Ganesh_Utsav_Ka_Mahatva.mp3
http://98.130.113.92/Bharat_Par_Videshi_Aakraman_Kargil_Yuddh.mp3
http://98.130.113.92/Aatankvaad_Aur_Uska_Nivaaran_WTC_Attack.mp3

— जय हिन्द !!!
— with प्रदीप सोनी विद्रोही and Deepanshu Yadav Abvp.

Thursday, 8 August 2013

राजीव दीक्षित के ऑडियो व्याख्यान डाउनलोड करें

राजीव दीक्षित के ऑडियो व्याख्यान डाउनलोड

राजीव दीक्षित के ऑडियो व्याख्यान डाउनलोड करें



दवा और डाक्टर के बिना सुखी और स्वस्थ कैसे रहें (How to stay Happy & Healthy without Medicine and Doctor) (download)


स्विस बैंकों में भारत की लूट(download)


खेती और किसानों की गुलामी(download)


भारतीय आजादी का इतिहास (History of India’s Independence)(download)


विदेशी विज्ञापनों का झूट(download)


एलिज़ाबेथ की भारत यात्रा(download)


मैकाले  शिक्षा पद्धति(download)


उधारीकरण और वैश्वीकरण(download)


विज्ञापनों का बाल मन पर प्रभाव(download)


गोरक्षा और उसका महत्त्व(download)


राम कथा(download)


महात्मा गाँधी को श्रधांजलि(download)


पेटेंट कानून और दवाओं पर हमला(download)


बिना दवाई और डॉक्टर के कैसे स्वास्थ्य रहे(download)


पोखरण परीक्षण और आर्थिक दिघ्बंधन(download)


भारत और यूरोप की संस्कृति(download)


जन गण मन  और वन्दे मातरम की कहानी(download)


भारत और पश्चिमी विज्ञान तकनीकी (download)


CTBT और भारतीय अस्मिता (download)


अर्थव्यवस्था को सुधारने के उपाय (download)


अर्थव्यवस्था को सुधारने के उपाय (download)


प्रतिभा पलायन – पुणे इंजीनियरिंग कॉलेज व्याख्यान (download)


स्वदेशी आन्दोलन में गणेश उत्सव का महत्व (download)


भारत पर विदेशी आक्रमण कारगिल युद्ध (download)


आतंकवाद और उसका निवारण — WTC (download)